नक्षत्र / अश्विनी
अश्विनी
Ashwini
सत्ताईस नक्षत्रों में 1वाँ, 0°00′ मेष – 13°20′ मेष तक फैला हुआ।
- विस्तार
- 0°00′ मेष – 13°20′ मेष
- स्वामी ग्रह
- केतु
- देवता
- अश्विनी कुमार
- प्रतीक
- अश्व का मस्तक
- गण
- देव
अश्विनी से राशिचक्र आरंभ होता है, और इसकी हर बात में आरंभ का ही गुण है — तेज़, अनुभवहीन, सोच पूरी होने से पहले ही चल पड़ने वाला। परंपरा में अश्विनी कुमार वैद्य हैं जो वेग से पहुँचते हैं, और चिकित्सा का यही जल्दबाज़ी के साथ जुड़ना इस भाग का पूरा स्वभाव है। यह काम अच्छा शुरू करता है, पूरा कम करता है।
स्वामी केतु है, जो इस गुण को नरम नहीं, और तीखा करता है। केतु को संचय में रुचि नहीं, इसलिए अश्विनी का चन्द्रमा जो बना चुका होता है उसे बिना अधिक मोह के छोड़ आगे बढ़ जाता है। व्यवहार में यहाँ प्रश्न यह कभी नहीं कि और तेज़ कैसे हुआ जाए। प्रश्न यह है कि पहला उत्साह ख़त्म होते ही व्यक्ति क्या छोड़ देता है, और क्या वह लौटकर आने की एक आदत बना सकता है।
पाद (नवांश)
| पाद | नवांश राशि | स्वामी |
|---|---|---|
| 1 | मेष | Mars |
| 2 | वृषभ | Venus |
| 3 | मिथुन | Mercury |
| 4 | कर्क | Moon |
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कुंडली बनाइएयह अध्ययन के लिए लिखा गया है, भविष्यवाणी के लिए नहीं। नक्षत्र एक प्रवृत्ति बताता है, नियति नहीं, और इस पृष्ठ की किसी बात को घटनाओं की भविष्यवाणी नहीं मानना चाहिए।