नक्षत्र / श्रवण
श्रवण
Shravana
सत्ताईस नक्षत्रों में 22वाँ, 10°00′ मकर – 23°20′ मकर तक फैला हुआ।
- विस्तार
- 10°00′ मकर – 23°20′ मकर
- स्वामी ग्रह
- चन्द्र
- देवता
- विष्णु
- प्रतीक
- कान
- गण
- देव
श्रवण का अर्थ है सुनना, और प्रतीक कान है। जिस परंपरा ने स्वयं को सदियों तक मौखिक रूप से आगे बढ़ाया, उसमें यह छोटा दायित्व नहीं है: यह भाग सुनकर सीखने का अधिष्ठाता है, और उसके साथ उस पूरी प्रक्रिया का जिससे ज्ञान किसी और से सही-सही ग्रहण किया जाता है।
स्वामी चन्द्र है, इसलिए यह सुनना केवल शिष्टाचार नहीं, ग्रहणशील और धारण करने वाला होता है। यहाँ बल रखने वाले प्रायः वही होते हैं जिन्हें दूसरे अपनी बात बताते हैं। कठिनाई यह है कि दूसरों की बात लेते-लेते बीता जीवन व्यक्ति को इस विषय में अस्पष्ट छोड़ सकता है कि वह स्वयं क्या सोचता है, और काम आने वाला अनुशासन यह है कि किसी और को सुनने से पहले अपना मत लिख लिया जाए।
पाद (नवांश)
| पाद | नवांश राशि | स्वामी |
|---|---|---|
| 1 | मेष | Mars |
| 2 | वृषभ | Venus |
| 3 | मिथुन | Mercury |
| 4 | कर्क | Moon |
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कुंडली बनाइएयह अध्ययन के लिए लिखा गया है, भविष्यवाणी के लिए नहीं। नक्षत्र एक प्रवृत्ति बताता है, नियति नहीं, और इस पृष्ठ की किसी बात को घटनाओं की भविष्यवाणी नहीं मानना चाहिए।