नक्षत्र / विशाखा
विशाखा
Vishakha
सत्ताईस नक्षत्रों में 16वाँ, 20°00′ तुला – 3°20′ वृश्चिक तक फैला हुआ।
- विस्तार
- 20°00′ तुला – 3°20′ वृश्चिक
- स्वामी ग्रह
- गुरु
- देवता
- इन्द्राग्नि
- प्रतीक
- तोरण
- गण
- राक्षस
प्रतीक है तोरण — वह द्वार जिसके नीचे से पहुँचने पर गुज़रा जाता है — और देवता हैं इन्द्र और अग्नि एक साथ, शक्ति और ज्वाला एक ही जोड़ी में। विशाखा एकाग्र संकल्प का भाग है: लक्ष्य तक की लंबी चढ़ाई, और जब तक लक्ष्य न मिले तब तक बाक़ी सब को उसके नीचे रख देने की तत्परता।
स्वामी गुरु है, जो इस महत्वाकांक्षा को केवल संचय नहीं, अर्थ से जोड़े रखता है। कठिनाई तोरण पर आकर शुरू होती है। विशाखा पीछा करने में जितनी अच्छी है, पहुँचने में उतनी नहीं, और देखने योग्य प्रवृत्ति यह है कि एक लक्ष्य के स्थान पर तुरंत दूसरा रख दिया जाता है ताकि व्यक्ति को जो मिला उसके साथ बैठना ही न पड़े। इसे नाम देना ज़रूरी है, क्योंकि यह चुपचाप एक दशक खा सकती है।
पाद (नवांश)
| पाद | नवांश राशि | स्वामी |
|---|---|---|
| 1 | मेष | Mars |
| 2 | वृषभ | Venus |
| 3 | मिथुन | Mercury |
| 4 | कर्क | Moon |
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कुंडली बनाइएयह अध्ययन के लिए लिखा गया है, भविष्यवाणी के लिए नहीं। नक्षत्र एक प्रवृत्ति बताता है, नियति नहीं, और इस पृष्ठ की किसी बात को घटनाओं की भविष्यवाणी नहीं मानना चाहिए।